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पुरुष आयोग की भूमिका: समाज में पुरुषों के योगदान को पहचानें

बहुत समय से कुछ पुरुष अधिकार संगठन जो की सभी गैर सरकारी संगठन (एन जी ओ) है पुरुष आयोग की मांग कर रहे है। इसके पीछे सोच यह है की पचास प्रतिशत आबादी जो की पुरुष है, सभी तरह के अपराध करते है, उन्हीका कब्ज़ा है हर संसाधन पर, वही सर्व शक्तिशाली है. पर हमारा यह कहना है की कुछ अपराधी पुरुषों के उदाहरण भर से सभी पुरुषों से मुंह मोड़ लेना जायज नहीं है?

आजकल कोई भी अखबार या न्यूज़ चैनल देख लीजिये, आपका यह भ्रम दूर हो जाएगा की अपराध सिर्फ पुरुष ही करते है. आजकल से समय में महिला अपराधियों की संख्या कम नहीं है. फिर भी यह समझना की महिलाये नीरीह प्राणी है, कोई अपराध नहीं कर सकती, कुछ गलत नहीं कर सकती ठीक नहीं है.

हमें यह समझना पड़ेगा की ऐसी धारणा क्यों बनी हुई है. इसकी वजह है एक बहुत बड़ी संख्या में एनजीओ है, जिनकी संख्या 10000 से भी अधिक है, उनकी सरकार में पैंठ। ये संस्थाएं पचास से ाहिक महिला सुरक्षा के लिए बने कानूनों का दुरूपयोग करती है. समझने की बात है कि महिलाओं के लिए अलग से मंत्रालय है, सरकारी नीतिया है. हर प्रांत में और एक केंद्रीय कमीशन भी है. “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान में लड़कियों को हर तरह की प्राथमिकताएं दी जाती है.

समझने की बात यह है कि पुरुषों के खिलाफ यह भेदभाव सिर्फ कानून में ही नहीं होता. एजुकेशन (शिक्षा) हैल्थकेयर (चिकित्सा) इत्यादि क्षेत्रो में भी पुरुषो से भेदभाव होता है.

आप यह जानकार चकित होंगे की प्रोस्टेट कैंसर (गदूद का कैंसर) उतना ही भयावह है जितना कि ब्रैस्ट कैंसर (स्तन कैंसर), पर स्तन कैंसर की रिसर्च पर प्रोस्टेट कैंसर से 25 गुना अधिक पैसा मुहैया कराया जाता है.

आप यह जानकार भी हैरान रह जाएंगे की भारत की IIM जैसी संस्थान ने भी यह स्वीकार किया है की वह महिलाओ को पुरुषो के बराबर लाने के लिए ग्रेस मार्क देती है. क्या यह पुरुषो के साथ अन्याय नहीं है.

इसके इलावा महिलाओ की सुरक्षा के लिए हज़ारो की संख्या में वेलफेयर होम है, पुरुषो के लिए नहीं.
महिला के मुक़ाबले 3 गुना पुरुष घर विहीन है.

इन सब समस्याओं के निवारण और पुरुषो के उतथान के लिए पुरुष आयोग का बनाना अत्यंत आवश्यक है

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